Saturday, August 12, 2017

संस्था में संयोजक की भूमिका

संयोजक की भूमिका व् कार्यकिलापें 

संयोजक शाखा या प्रान्त या राष्ट्र कोई भी स्तर के हो संस्था में एक महत्वपूर्ण दायित्व का निर्वाहन करतें है. वो नेतृत्वकर्ताओं द्वारा तय किये हुए वार्षिक या कार्यकाल के लक्ष्यों को जमीन पर उतारने के महत्वपूर्ण कारक होतें है. नेतृत्वकर्ता और संयोजक व् संस्था के लक्ष्यों में समन्वय हो तो कोई भी प्रकार के सामजिक लक्ष्यों की प्राप्ति सम्भव है.

अक्सर यह देखा जाता है कि विभिन्न स्तर के संयोजक चाहे वो शाखा स्तर के हो या प्रांतीय स्तर पर या फिर राष्ट्रिय स्तर के अपने विभाग के अंतर्गत पड़ने वाले विभिन्न कार्यक्रमों का क्रियान्वन तो वे श्रेष्ठम तरीके से कर लेतें है परन्तु नये कार्यक्रमों का सृजन नहीं कर पातें जो पूर्ण रूपें उन पर निर्भर करता है. इस लेख में हम संयोजक के दायित्व के विभिन्न पहलुओ पर चर्चा करेंगे.

 सर्वप्रथम यह तय है कि किसी भी स्तर के नेतृवकरता द्वारा संयोजक की नियुक्ति  सभी प्रकार के उपलब्ध मापदंडो को देखते हुए उनकी सक्षमता के अनुरूप होती है. नेत्रित्वकर्ता की पैनी नजर से संयोजक का चयन होता है, वो उसकी पूर्व की कार्यशैली से प्रभावित हो उसे वह महत्वपूर्ण पद का दायित्व सौपता है. ऐसा मान सकतें हैं कि एक संयोजक अपनी कार्यशैली में श्रेष्ठ होता है. लेकिन ज्यादातर मामलों में देखा जाता है संयोजक स्वयं मंथन करते हुए अपने से यह पूछता है कि उसे अपने विभाग में और क्या करना है. चूँकि वो श्रेष्ठ होता है वो पूर्व में अपनी क्षमताओं का लोहा मनवा चूका होता है, अपने आप को साबित कर चूका होता है, वो दुसरो से भी समझने का प्रयास करता है कि उसे संयोजक स्वरुप करना क्या है. चूँकि कोई भी कार्यक्रम मिलने पर वो उसे श्रेष्ठतम तरीके से क्रियान्वन कर के दिखाता है, उसे इस बात की कचोट रहती है कि पूर्व में उसके दायित्वों के अनुरूप किये हुए कार्य के अनुरूप उसे वर्तमान का कार्य नहीं मिला है, और वह असंतुष्ट रहने लग जाता है. लेकिन उसे इस बात का संज्ञान रखने में समय लग जाता है या फिर उसे मार्गदर्शन नहीं मिल पाता कि कितने महत्वपूर्ण भूमिका उसे मिली है और उसके विभाग में ही अनन्तर कार्य करने की सम्भावनाएं है अगर वो इस पर ध्यान केन्द्रित करें व् मंथन करें.

उपसमिति के अंतर्गत विभिन्न कार्यक्रम सुनिश्चित करने की विधियाँ व् पहलुएँ :-

1. समस्याएं: सर्वप्रथम संयोजक को यह तय करना चाहिए कि उस विशेष उपसमिति का गठन क्यूँ हुआ, क्या समस्याएं उस समय वैश्विक व् देश शहर समाज  को सामना कर रहा है. क्या वह समस्या क्षणिक है या साल के कुछ समय के लिए वह समस्या उत्पन्न होती है या वह एक जटिल लम्बे समय वाली समस्या है.

कई बार समस्या इतनी पुरानी प्रतीत होती है कि उस पर कोई ध्यान केन्द्रित नहीं कर पाता परन्तु बस एक छोटे से कदम की जरूरत होती है. संयोजक उपसमिति में नया पदोंन्नित हुआ हो तो उसे समिति के पूर्व पदाधिकारियों से संपर्क कर पूर्व की योजनाओं व् पूर्व में आई समस्याओं के बारें में जानकारी प्राप्त करने का प्रयास करना चाहिए.

2. सम्भावित निदान : समस्याओं को चिह्नित करने के पश्चात उसके संभावित निदान की और जाएँ. कई बार होता है समस्यायें जटिल होती है परन्तु उसका हल छोटे छोटे कदम लेने पर पहुंच जा सकता है. पर संयोजक को निश्चित करना चाहिए कि विभिन्न समस्याओं का निदान कैसे करना है, पुरे वर्ष में निरंतर कार्यक्रम होंगे या एक दो कार्यक्रम से ही समस्या का समाधान हो सकता है. पूर्व पदाधिकारियों या नेतृत्व कर्ताओं के पास क्या समाधान है या उन्होंने क्या सोच रखा है इस पर विचार विमर्श करके ही विभाग के अंतर्गत आगामी कार्यक्रमों की सूची तैयार करनी चाहिए.

3. मदद: आज के दौर में विभिन्न समस्याओं पर विभिन्न सरकारी व् गैर सरकारी संस्थाओं के पास योजनाये होती है जो बेहतरीन क्रियान्वन के आभाव में फाइलों में ही बंद रह जाती है. संयोजक को सम्बंधित सरकारी विभाग, जिले के उपायुक्त व् अन्य अन्यान्य गैर सरकारी संस्थाओं के प्रमुखों से संवाद स्थापित कर के सम्भावित उपलब्ध मदद पर भी ध्यान देकर कार्यक्रम विवरण बनाना चाहिए. विभिन्न औधोगिक संस्थानों में CSR- समष्टिगत सामाजिक उतरदायित्व निधि को भी संस्थाओं के सामजिक कल्याण के कार्यों में लगाया जा सकता है और उसे कैसे प्राप्त कर सकतें है इस पर भी मंथन करना चाहिए.

4. दूरदर्शिता- यह संयोजक के पास होने वाली सबसे महत्वपूर्ण पूंजी है. किस काल में किस समय में कार्यक्रमों का क्रियान्वन करना है, किस सामाजिक समस्या का निवारण होगा, क्या प्रभाव पड़ेगा समाज पर व् लाभान्वितों पर कितने समय तक व् प्रभाव रहेगा, शहर व् समाज की अन्य संस्थाओं से किस प्रकार से समन्वय व् गठजोड़ स्थापित हो सकती है, समाज के वरिष्ठ व् युवा सदस्यों से क्या प्रभावी सहयोग ले सकतें हैं, विभिन्न निजी/सरकारी/गैर सरकारी औधोगिक घरानाओं/कम्पनियों की CSR पहलों का कैसे उपयोग किया जा सकता है, उनको अपनी संस्था के विभिन्न क्रियाकलापों की जानकारी निरंतर समय समय पर कैसे उपलब्ध करवाए जा सकतें हैं, इन सबों पर मंथन करते हुए एक दूरदर्शिता का परिचय देना चाहिए व् उसी अनुसार विभिन्न कार्यक्रमों का सम्पादन करना चाहिए.

5. सम्वाद- एक कुशल संचार व् सम्वाद व्यवस्था अपने सभी सहयोगियों व् संस्था व् समाज के लोगो के साथ अति महत्वपूर्ण है. हालांकि आज के टेक्नोलॉजी के युग में यह बहुत ही आसान हो गया है. फेसबुक, व्हात्सप्प, यू ट्यूब जैसे दूरसंचार माध्यमो से दूर बैठे ही महत्वपूर्ण संदेश अनेकानेक लोगो तक प्रभावी ढंग से पहुंचा सकतें हैं. सभी संयोजकों को इन माध्यमों की सही जानकारी होनी चाहिए जैसे अपने विभाग की हर संयोजक एक यू ट्यूब चैनल बना कर अपने सहयोगियों व् समाज के लोगो को उनकी लिंक व्हात्सप्प व् फेसबुक के जरिये भेज सकतें हैं. उनकी प्रतिक्रियाये भी इसी प्रकार ली जा सकती है. आज के आधुनिक युग में विशेष कर युवाओं से सम्पर्क व सम्वाद स्थापित करने के शशक्त माध्यमों के रूप में ये उभरें है. प्रांतीय संयोजक अपने राष्ट्रिय संयोजक से भी कार्यक्रमों की जानकारी लेता रहें व् कोई समस्या आई हो तो उसका मार्गदर्शन अपने शीर्ष के पदाधिकारियों से ले सकता है.

6.  रिपोर्टिंग - यह अति महत्वपूर्ण है कि प्रांतीय स्तर पर संयोजक विभिन्न शाखाओं में हुए कार्यक्रम की जानकारी पूर्व में ही रखे. चूँकि कार्यक्रम क्रियान्वन में प्रांतीय संयोजक शाखा के नेतृत्वकर्ता से ही सम्पर्क में रहता है वो सभी संचार माध्यम के कुशल उपयोग से अपनी रिपोर्ट बना कर रख सकता है जिसे वह समय आने पर प्रांतीय या राष्ट्रिय स्तर के नेतृत्व कर्ताओं को दिखा सकता है. उसे प्रांतीय या राष्ट्रीय कार्यलय से भेजी शाखाओं के रिपोर्ट का इंतज़ार नहीं करना चाहिये. जहाँ मुख्यालय मात्र ईमेल व् चिठी से भेजी रिपोर्ट्स को ही मान्यता देती है, परन्तु प्रांतीय संयोजक को सभी संचार माध्यम में उपलब्ध शाखाओं की जानकारी से वो अपनी मासिक/त्रैमासिक/वार्षिक रिपोर्ट बना सकता है.

7. प्रोत्साहन - यह भी प्रांतीय संयोजक के कुशल कार्यक्रम क्रियान्वन की एक महत्वपूर्ण कुंजी है. प्रोत्साहन सिर्फ पुरष्कारों से ही नहीं अपितु शाखा नेतृत्वकर्ता की समस्या सुन कर समझ कर उनको सही मार्गदर्शन देने से भी आती है. आज के युगल पारिवारिक ढांचे में अपनी विभिन्न पारिवारिक व् व्यसायिक जिम्मेवारियों का निर्वाहन करते वो संस्था के कार्य को करतें है. साथ ही हर कार्यक्रम में कार्यक्रम क्रियान्वन में एक निश्चित राशि की उपलब्धिता करवाने की महत्वपूर्ण जिम्मेवारी भी उसे निभानी होती है. कार्यक्रम संयोजक को अपने स्वयं के शाखा के दायित्वों के कुशल निर्वाहन व् अपने तजुर्बे से शाखा नेतृत्वकर्ता को कुशल मार्गदर्शन देते हुए उसको प्रोत्साहित करने का सतत प्रयास करना चाहिए.

8. पुरस्कार व् सम्मान- शाखा व् शाखा नेतृत्वकर्ता व् सभी सदस्यों के लिए अपने शीर्ष पदाधिकारियों से अच्छे कार्यों से हुई पहचान अति महत्वपूर्ण होती है. यह जरूरी है कि संयोजक ना ही सिर्फ अपने क्षेत्र में हुए कार्यों की अपितू उनके अन्य कार्यों की भी खुले कंठ से प्रशंसा करे. उनके शाखा पदाधिकारियों के संग मासिक पत्राचार में यह बातें निश्चित रूप से हो. पत्राचार इसलिए भी उन पत्रों को व् उसमे लिखे अंतर्वस्तु को शाखा नेतृत्वकर्ता अपने सभाओं में मौजूद सदस्यों को दिखाता भी है अपने शाखा के सदस्यों व् पदाधिकारियों का मनोबल भी बढाता है व् आगामी कार्यों को करने से प्रेरित भी करता है. इस प्रकार यह एक शाखा व् प्रान्त के बीच एक पूली का कार्य करती है. सोशल मिडिया जैसे तेज संचार माध्यमो में जहाँ विभिन्न कार्यक्रमों की जानकारी जल्द दी जा सकती है इन पत्राचारों से शाखाओं की रूह को स्पर्श किया जा सकता है. प्रांतीय सभाओं में पुरस्कारों के अलावा प्रान्त की प्रशश्ति पत्र भी देने के प्रावधान किया जा सकता है.

जहाँ शीर्ष के प्रांतीय पदाधिकारी सांगठनिक कार्यों में ज्यादातर व्यस्त रहतें हैं, राष्ट्रीय व् प्रांतीय कार्यों में समन्वय का कार्य करते हैं, प्रांतीय संयोजक प्रान्त व् शाखा के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी होतें हैं व् सम्पूर्ण प्रान्त को एक सामान्य सामाजिक चाह व् लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक होतें है.

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यह लेख कैसा लगा अपनी राय निचे कमेंट बॉक्स में जरूर देंगे. लेखक झारखण्ड प्रांतीय मारवाड़ी युवा मंच में वर्ष २०१५-१६ में स्वस्थ्य, नेत्र दान, प्रयावरण व् कैंसर जांच अभियान के प्रांतीय संयोजक का दायित्व निर्वाह कर चुके हैं. अखिल भारतीय मारवाड़ी युवा मंच के अलावा वे फेडरेशन ऑफ़ झारखण्ड चैम्बर ऑफ़ कॉमर्स व् कई स्थानीय संस्थाओं में सेवाएँ देते आये हैं...



 































Saturday, June 4, 2016

रक्तदान सप्ताह(12-18 जून'16 विशेषांक)

आप सभी को आगामी रक्तदान सप्ताह(12 जून से 18 जून'16) की अग्रिम शुभकामनाएं।


14 जून को 'विश्व रक्तदान दिवस' है। कुछ बातें मंच की व् इससे सम्बंधित पुनः एक अपील सभी से।
आये दिन सभी को अपने परिजनों व् हितैषियों के लिए 'रक्त यूनिट्स' की जरूरत पड़ते ही रहती है। स्थानीय रक्त अधिकोशों(ब्लड बैंक) में 'रक्त की उप्लब्धिता' ना होने पर लोग रुख करतें हैं पूर्णतः निःस्वार्थ भाव से लगे 'मारवाड़ी युवा मंच' जैसे समाज-जन सेवा में अग्रणी संस्थाओं व् सदस्यों की ओर। और ये सदस्य कहाँ पीछे रहते है-एक सन्देश(sms/whatsapp/call) भर की देर है, और जरूरतमन्द के फ़ोन की घण्टी बज जाती है - "कहाँ आना है"। स्वयं अगर उपलब्ध ना हो पातें हो तो अपने साथियों को सन्देश भेजतें हैं- 'तुरंत आ जाओ फलाने जगह'।

 धन्य हो आप हम सभी युवा साथीगण। धन्य है हमारे शाखा के स्तम्भ रुपी सभी वरिष्ठ सदस्यगण व् सभी पूर्व शाखाध्यक्ष गण हम सभी सदस्यों को ऐसे महान जनसेवा कार्यों के 'सांचे में ढालने' के लिए व् आगे बढ़ कर सद्कार्य करने के लिए प्रेरित करने के लिए। धन्यवाद 'सद्कार्य कर स्वयं उदहारण' पेश करने के लिए ताकि नए सदस्य आपसे ही सीखे। शायद परिवारों में ही ऐसा होता है परन्तु चाह समस्त अवसरों व् क्षेत्रों में होता है कि समाज के वरिष्ठ भावी व् नइ पीढ़ियों को स्वयं व् खुद के सद्कार्यों के उदहारण से दिशा दिखाए व् नेतृत्व करें। और इसमें मंच के समस्त वरिष्ठ सदस्य 'हृदय से बधाई' के पात्र हैं। बारम्बार नमन सबको।


अब '14 जून के विश्व रक्तदान दिवस' व् आगामी रक्तदान सप्ताह(12 जून से 19 जून) पर कुछ विचार।
यह विचार मैं अपने शहर के विभिन्न राजनितिक, सामाजिक, सरकारी, गैर सरकारी, निजी संघटनों व् व्यक्तित्वों आदि को प्रत्यक्ष-परोक्ष रूप में सम्बोधित करते हुए अपने मन मानस से उनसे सम्वाद व् आह्वान करना चाहता हूँ।

महोदय, आये दिन आप अपने अपने क्षेत्रों के पीड़ितों के लिए स्थानीय रक्त अधिकोष अथवा युवा मंच जैसे सामाजिक संस्थाओं में आवेदन भेजते रहतें हैं, अपने समर्थकों को रेफेर करते रहतें है, परन्तु आज सभी शहर वासियों के समक्ष 'अपने वार्ड/शहरी क्षेत्र/गाँव आदि) में बसे अपने समर्थकों को इस 'रक्तदान सप्ताह' में 'रक्तदान महादान' करवा 'एक उदाहरण' तो पेश करवाएं ही साथ में उन्हें 'नियमित रक्तदान' करवा उनकी 'भ्रांतियों' को भी खत्म करवाएं ताकि वे खुद 'रक्तदान' की मशाल को अन्य लोगो के मन मस्तिस्क में जला सकें।
मुझे गिरिडीह रक्त अधिकोष के सचिव माननीय श्री सुबोध प्रकाशजी द्वारा सूचना प्राप्त हुई है कि '14' तारीख को तो गिरिडीह judiciary द्वारा 'रक्तदान शिविर' का आयोजन किया जा रहा है। और 1-2 संस्था उनसे टच में है शिविर के लिए। परन्तु मैं अपील करता हूँ वर्तमान व् भावी जन प्रतिनिधियों को सामने आये, उत्साहवर्धक प्रतिस्पर्धा करें अपने ज्यादा से ज्यादा समर्थकों को रक्तदान के लिए प्रेरित करने के लिए।
BJP
CONGRESS
JVM
JMM
AAP
CPI(M)
Any other
नगर पार्षद
जिला परिषद
पुलिस एसोसिएशन
ड्रग्स एसोसिएशन
बार एसोसिएशन
कपड़ा व्यवसायी मण्डल
अन्यान्य व्यापारिक-औद्योगिक मण्डल
स्कूल-कॉलेज के छात्र-शिक्षक
Professionals association आदि
12 जून Sunday
13 जून Monday
14 जून Tuesday
15 जून Wednesday
16 जून Thursday
17 जून Friday
18 जून Saturday
विभिन्न प्रकार के राजनीतिज्ञ पार्टिया व् प्रोफेशनल व्यापारिक associations अगर इस 'रक्तदान सप्ताह' में कभी कोई कभी कोई स्वेक्षिक रूप से ब्लड बैंक में 'रक्तदान शिविर' लगा सकता है तो इसकी बात ही कुछ अलग होगी। नागरिकों में भ्रांतिया दूर होने के साथ नागरिकता का बोध व् जरूरत पड़ने पर स्वयं रक्तदान करने की आदत पड़ेगी।
आशा है क्रमशः विभिन्न शहरों के लोग अपने अपने शहर में आगामी 'रक्तदान सप्ताह' में विभिन्न व्यतित्वों के संग विभिन्न संघटनो को भी एकजुट व् आह्वान कर उन्हें व् उनके सदस्यों से भी 'रक्तदान' करवाने का प्रयास करवाएंगे।
रक्तदान   महादान।
युवा शक्ति  राष्ट्र शक्ति।।
आपका साथी
नीलकमल भरतिया

14 जून - 'विश्व रक्तदान दिवस'- एक आह्वान व् अपील

14 जून - 'विश्व रक्तदान दिवस'- एक आह्वान व् अपील
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बन्धुओं व् साथियों,

आये दिन हम सब 'रक्त की urgent आवश्यकता' सम्बंधित सन्देश पढ़ते रहतें है। जरूरत के समय 'रक्त की उप्लब्धिता' भी करायी जाती रही है। और जब 'रक्त की उप्लब्धिता' किसी कारण वष रक्त अधिकोशों या सामाजिक संस्थाओं से नही हो पाती तो 'विषम परिस्थितियों' का फायदा आसामाजिक तत्वों द्वारा रोगियों को हज़ारों का चुना लगा कर किया जाता है।
और इसका मुख्य कारण है, आम जनमानस में 'स्वेक्षिक रक्तदान' के लिए 'जागरूकता का अभाव'। विभिन्न प्रकार के स्व गढ़ित 'भ्रांतियों' के कारण मजबूत शरीर वालों में भी व् स्वस्थ व्यक्तियों द्वारा भी 'रक्तदान' के प्रति अज्ञानता झलकती रही है।
एक रिसेंट डाटा के अनुसार भारत में हर साल 1 करोड़ यूनिट्स रक्त की जरूरत देश के विभिन्न अस्पतालों में होती है जिसमे 75 लाख यूनिट्स तो उपलब्ध हो जाती है परन्तु 25 लाख रक्त यूनिट्स की कमी देश इस समय भयवाता से देख रहा है। इतने यूनिट्स की कमी के कारण कई देश वासियों के प्राण जहां संकट में आते रहें हैं वहीं इनके परिजनों के हज़ारो रुपये चले जाते हैं।
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साथियों,

इस माह जून में 14 तारीख को 'विश्व रक्तदान दिवस' है। आप हम सबो ने तो जरूर कभी ना कभी स्वेक्षिक रक्तदान किया ही होगा। परन्तु आइये इस माह को एक नया संकल्प लेतें हैं कि हम न्यूनतम 5 नए व्यक्तियों को 'स्वेक्षिक रक्तदान' के लिए प्रेरित करेंगे। और हो सके तो 'न्यूनतम 2 व्यक्तियो को' 14 जून या उसके आस पास संग चल कर स्थानीय रक्त अधिकोष(ब्लड बैंक) या 'रक्तदान शिविर' में 'रक्तदान' करवायेंगें। और यह पूर्णतः सम्भव है। बस जरूरत है थोड़े से प्रयास की आपकी और से।

अतः पुनः आह्वान व् अपील सभी साथियों को - 'देश में रक्त की भारी कमी को देखते हुए' आइये स्वयं रक्तदान करें व् दूसरों को भी प्रेरित करे व् अपने मानव जीवन को सफल बनाएं।

विशेष धन्यवाद अखिल भारतीय मारवाड़ी युवा मंच के  राष्ट्रीय संयोजक(रक्तदान) Subhash Bhatter जी, राष्ट्रीय अध्यक्ष Ravi Agrawal ji, झारखण्ड प्रान्त के प्रांतीय संयोजक(रक्तदान) Arun Gupta जी व् झारखण्ड के प्रांतीय अध्यक्ष Rakesh Modiजी हम सबों के लिए निरन्तर आदर्श स्थापित करने के लिए।

धन्यवाद।

युवा शक्ति।                  राष्ट्र शक्ति।।

आपका साथी

नीलकमल भरतिया